जयपुर: नईनाथ धाम भगवान शंकर के विशाल धाम पर गौतम आश्रम ट्रस्ट नईनाथ धाम द्वारा उपनयन (जनेऊ) संस्कार शुक्रवार 19 जून 2026को आयोजित होने जा रहा है। मुकेश कुमार गौतम नारौली चौड़ ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बटुकों को उपनयन (जनेऊ)संस्कार शिविर आयोजित किया जा रहा है। समाज के भामाशाह (समाज सेवी) और गौतम आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री शिव कुमार शर्मा (काशीपुरा वाले) की और से आयोजित भव्य कार्यक्रम में समाज के सभी संस्थाएं,समितियां,ट्रस्ट आदि बटुकों के रजिस्ट्रेशन कर शिविर में उपनयन हेतु भेजने में सहयोग किया जा रहा है। ट्रस्ट अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने बताया कि युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए नि:शुल्क उपनयन (जनेऊ) संस्कार का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें बटुकों को धार्मिक परंपराओं से अवगत कराया जाएगा। जनेऊ केवल एक धागा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, उच्च आदर्शों, अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक है. उन्होंने आगंतुक बटुकों से अपील की वे धर्म के मार्ग पर चलें, बड़ों का सम्मान करें तथा समाज में ज्ञान और सेवा की भावना फैलाएं. उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्कारों से ही व्यक्ति का चरित्र निर्माण होता है और भारतीय संस्कृति की जड़ें इन्हीं परंपराओं में निहित हैं गुर्जरगौड़ ब्राह्मण समाज आध्यात्मिक परंपराओं के संवर्धन के कार्य करता रहा है और यह उपनयन (जनेऊ) शिविर भी एक अलौकिक भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा।आप सभी समाज बंधु कार्यक्रम में सपरिवार सादर आमंत्रित है।
जयपुर: नईनाथ धाम भगवान शंकर के विशाल धाम पर गौतम आश्रम ट्रस्ट नईनाथ धाम द्वारा उपनयन (जनेऊ) संस्कार शुक्रवार 19 जून 2026को आयोजित होने जा रहा है। मुकेश कुमार गौतम नारौली चौड़ ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बटुकों को उपनयन (जनेऊ)संस्कार शिविर आयोजित किया जा रहा है। समाज के भामाशाह (समाज सेवी) और गौतम आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री शिव कुमार शर्मा (काशीपुरा वाले) की और से आयोजित भव्य कार्यक्रम में समाज के सभी संस्थाएं,समितियां,ट्रस्ट आदि बटुकों के रजिस्ट्रेशन कर शिविर में उपनयन हेतु भेजने में सहयोग किया जा रहा है। ट्रस्ट अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने बताया कि युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए नि:शुल्क उपनयन (जनेऊ) संस्कार का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें बटुकों को धार्मिक परंपराओं से अवगत कराया जाएगा। जनेऊ केवल एक धागा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, उच्च आदर्शों, अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक है. उन्होंने आगंतुक बटुकों से अपील की वे धर्म के मार्ग पर चलें, बड़ों का सम्मान करें तथा समाज में ज्ञान और सेवा की भावना फैलाएं. उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्कारों से ही व्यक्ति का चरित्र निर्माण होता है और भारतीय संस्कृति की जड़ें इन्हीं परंपराओं में निहित हैं गुर्जरगौड़ ब्राह्मण समाज आध्यात्मिक परंपराओं के संवर्धन के कार्य करता रहा है और यह उपनयन (जनेऊ) शिविर भी एक अलौकिक भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा।आप सभी समाज बंधु कार्यक्रम में सपरिवार सादर आमंत्रित है।

Post a Comment