जयपुर। पिंकसिटी प्रेस क्लब में रविवार शाम संगीत प्रेमियों के लिए यादगार बन गई, जब उत्कर्ष की ओर से 'सुर सुकून' नामक संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के कई प्रतिभाशाली गायकों ने हिंदी फिल्म संगीत के सदाबहार गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सुर सुकून संस्था की फाउंडर बबीता शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य संगीत के माध्यम से लोगों को एक साथ जोड़ना तथा पुरानी और नई पीढ़ी के बीच सदाबहार गीतों की विरासत को जीवंत बनाए रखना है।
कार्यक्रम में "जाने क्यों लोग मोहब्बत किया करते हैं", "दोस्त दोस्त ना रहा", "जीना यहां मरना यहां", "तेरी आंखों के सिवा", "तौबा ये मतवाली चाल", "रहे ना रहे हम", "ओ हंसिनी", "आने से उसके आए बहार", "लंबी जुदाई", "लाई वी ना गई", "दिल ढल जाए", "चांद सी महबूबा", "इक अजनबी हसीना से", "तेरी मोहब्बत का", "दीवाना हुआ बादल", "गुलाबी आंखें", "पुकारता चला हूं मैं", "दिल क्या करें", "तुम भी चलो हम भी चले", "वादियां मेरा दामन", "जो तुमको पसंद हो", "वक्त का ये परिंदा", "दूरी ना रहे कोई", "चांद आहें भरेगा", "लग जा गले" तथा "ये मेरा दीवानापन है" जैसे लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दी गईं। हर प्रस्तुति पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इस संगीतमय शाम में ममता शर्मा, मुकेश गुप्ता, बीबी खंडेलवाल, दीपक कपूर, हंसराज राजोरिया, मीनाक्षी राठौड़, राजकुमार शर्मा, अरुण त्रिपाठी, इंदु वर्मा, सुरजीत चौहान, परीक्षित पारीक, मुकेश भार्गव, मुकेश मुतरेजा, प्रदीप शर्मा, तनिष्क श्रीवास्तव, जुगल डांगी,मानसी शर्मा शुभ्रोजीत गुप्ता, रामचन्द्र केसवानी, रितेश श्रीवास्तव, मधु सिंघल, राकेश सोनी, एनडी व्यास, रीना शर्मा, संजय सक्सेना, वान्या श्रीवास्तव तथा प्रमोद वर्मा ने अपनी सुरीली आवाज़ से समां बांध दिया। एस. बबलू के म्यूजिक संयोजन से सजे इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संगीत प्रेमी देर शाम तक गीतों का आनंद लेते रहे। पुरानी फिल्मों के सदाबहार नगमों और मधुर प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। आयोजन के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया तथा भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प व्यक्त किया गया। मंच संचालन प्रतिक्षा शर्मा ने किया

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