राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित तीन किताबों का लोकार्पण
जयपुर। राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित तीन काव्य संग्रहों ‘बातों ही बातों में’ (गिरजा शंकर त्रिवेदी, उदयपुर), ‘नव रस गगरी छलकी जाए’ (लता शर्मा ‘निहान’, अजमेर) और ‘प्रेमरूप’ (अनुराग सिहरा, करौली) का लोकार्पण कलमकार मंच और पिंकसिटी प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार विनोद भारद्वाज, डाॅ. सत्यनारायण, फारूक अफरीदी, राजाराम भादू, लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’, चरणसिंह पथिक, प्रेमचंद गांधी और कलमकार मंच के राष्ट्रीय संयोजक निशांत मिश्रा ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार विनोद भारद्वाज ने कहा कि साहित्य का दायित्व समाज के यथार्थ को सामने लाना होता है, इसके लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि लेखक अपने आस पास एवं समाज में हो रहे घटनाक्रम व परिर्वतन पर मंथन करे और शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करे। कविता का मूल्य उसके कथ्य, संवेदना और संदेश में निहित होता है। डाॅ. सत्यनारायण ने कहा कि नए लेखकों को समकालीन साहित्यकारों को पढ़ना चाहिए जिससे उन्हें अपनी रचना अधिक परिष्कृत, संतुलित और प्रभावशाली बनाने में आसानी होगी।
वरिष्ठ लेखक फारूक अफरीदी ने लेखक को निरंतर अध्ययन, आत्मसमीक्षा और सामाजिक सरोकारों के प्रति सजग रहते हुए सृजन करने की सलाह दी। वरिष्ठ आलोचक एवं विचारक राजाराम भादू ने कहा कि कलमकार मंच ने हिंदी साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और लेखक और प्रकाशक के बीच संवाद को मजबूत किया है।
वरिष्ठ शायर लोकेंद्र कुमार सिंह ‘साहिल’ ने नवांकुर कवियों को व्यापक पठन-पाठन की सलाह देते हुए कहा कि कविता में भाव और विचार का संतुलित समन्वय होना चाहिए। उन्होंने एआई के माध्यम से लिखी जा रही कविताओं को भी साहित्य के सामने उभरती चुनौती बताया। मंच के राष्ट्रीय संयोजक निशांत मिश्रा ने कहा कि साहित्य की प्रत्येक विधा समय के साथ बदलती रहती है। हर विधा ने समयानुसार अपने स्वरूप और अभिव्यक्ति का विस्तार किया है तथा साहित्य को समृद्ध बनाया है। इस अवसर पर प्रसिद्ध कथाकार चरणसिंह पथिक और प्रेमचन्द गांधी ने भी विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र में लता शर्मा ‘निहान’ व अनुराग सिहरा ने अपनी-अपनी पुस्तकों और लेखन-दृष्टि पर विचार व्यक्त किए। वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. मधु खण्डेलवाल, युवा कवि विजय राही एवं महेश कुमार में तीनों काव्य संग्रहों पर समीक्षात्मक टिप्पणी की। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार दिनेश ठाकुर, राजेश शर्मा, मुखर कविता, विनीता सोनी, जनित, अरुण ठाकर ‘जिन्दगी’, तेजस्वी यादव सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और पत्रकार मौजूद थे। अंत में निशांत मिश्रा ने आभार व्यक्त किया।

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