Popular

सरकारी स्कूलों की बदहाली मामला : अब मूक-बधिर छात्र भी धरने पर बैठने को मजबूर, शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दें इस्तीफा – संयुक्त अभिभावक संघ

जयपुर

सरकारी स्अब मूक-बधिर छात्र भी धरने पर बैठने को मजबूर

। संयुक्त अभिभावक संघ ने राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, जयपुर के श्रवण एवं वाणी-बाधित छात्र-छात्राओं द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठने की घटना को प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया है। संघ ने कहा कि जब विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी अपनी मूलभूत सुविधाओं, सुरक्षित विद्यालय भवन, प्रशिक्षित शिक्षकों और शैक्षणिक अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़े, तो यह राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है।

संघ प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि प्रदेश के सरकारी विद्यालय वर्षों से जर्जर भवनों, शिक्षकों के हजारों रिक्त पदों, संसाधनों की कमी, अव्यवस्थित व्यवस्थाओं और प्रशासनिक उदासीनता का सामना कर रहे हैं। शिक्षा विभाग लगातार नई घोषणाएं तो करता है, लेकिन धरातल पर विद्यालयों की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। आज स्थिति यह है कि सामान्य विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि दिव्यांग विद्यार्थी भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए धरना देने को विवश हैं।

संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि यदि सरकार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी सम्मानजनक और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध नहीं करा सकती, तो यह शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न है। विद्यालय भवन की मरम्मत, कथित अवैध वसूली पर रोक, हियरिंग इम्पेयरमेंट क्षेत्र में प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है, जिसे निभाने में विभाग और मंत्रालय पूरी तरह विफल रहा है।

प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं, हजारों विद्यालय जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं और विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि श्रवण एवं वाणी-बाधित छात्र-छात्राओं को भी अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए धरने का सहारा लेना पड़ रहा है। यह सरकार की संवेदनहीनता और शिक्षा विभाग की प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट प्रमाण है।

अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री अपने विभाग की ऐसी दुर्दशा और बच्चों की पीड़ा के बावजूद जिम्मेदारी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, तो उन्हें नैतिक आधार पर तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। जिस प्रदेश में बच्चे पढ़ाई छोड़कर अपनी मूलभूत मांगों के लिए धरना देने को मजबूर हों, वहां शिक्षा व्यवस्था पर सरकार की सफलता के दावे पूरी तरह खोखले साबित होते हैं।

संयुक्त अभिभावक संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मूक-बधिर विद्यालय के छात्रों की सभी मांगों पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए, विद्यालय की जर्जर इमारत की मरम्मत कराई जाए, प्रशिक्षित शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति की जाए, कथित अवैध वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों की स्थिति का व्यापक मूल्यांकन कर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाए जाए ।

Post a Comment

Previous Post Next Post