उपायुक्त को सदस्यों ने दी शिकायत,पाबंदी के बावजूद राजनीतिक कार्यक्रम कराने का आरोप
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,8जुलाई।पंजाब के लुधियाना के मशहूर सतलुज क्लब में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया । क्लब के कुछ सदस्यों ने उपायुक्त को लिखित शिकायत देकर क्लब परिसर में राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर सवाल उठाए हैं।
क्लब सदस्यों ने कहा कि सतलुज क्लब के नियमों के अनुसार यहां किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि आयोजित नहीं की जा सकती। दरअसल, 28 जून को एक भाजपा नेता ने सतलुज क्लब में प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम के प्रसारण का आयोजन करवाया था। इस कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। क्लब के सदस्यों का आरोप है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह राजनीतिक था, जबकि क्लब के संविधान के अनुसार परिसर में किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि आयोजित नहीं की जा सकती।
दूसरी ओर भाजपा नेता का कहना है कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम का प्रसारण था, जिसे पीएमओ की ओर से आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्होंने क्लब में बुकिंग करवाई थी और निर्धारित भुगतान भी किया था।
क्लब के सदस्यों का दावा है कि इस कार्यक्रम के लिए क्लब अध्यक्ष-सह-उपायुक्त हिमांशु जैन से कोई अग्रिम अनुमति नहीं ली गई थी। वहीं, उपायुक्त हिमांशु जैन ने मामले में शिकायत मिलने की पुष्टि की है, जिसकी एडीसी जांच करेंगे।
क्लब सदस्यों के एतराज की सबसे बड़ी वजह क्लब का नियम है। सतलुज क्लब के संविधान में साफ तौर पर लिखा है कि क्लब परिसर के भीतर किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि करवाने पर पूरी तरह पाबंदी है। सदस्यों का आरोप है कि 28 जून को भाजपा नेता ने नियमों को ताक पर रखकर यहां पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का आयोजन करवाया। कार्यक्रम में सिर्फ राजनीतिक बातें की गईं, जो क्लब के संविधान का सीधा उल्लंघन है।
क्लब के एक निर्वाचित पदाधिकारी और कार्यकारी सदस्य ने अपनी लिखित शिकायत में कहा है कि कार्यक्रम को लेकर उन्हें कोई सूचना ही नहीं थी। उनका कहना है कि वे क्लब के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, लेकिन इतने बड़े राजनीतिक आयोजन को लेकर मैनेजमेंट ने उन्हें एडवांस में कोई जानकारी नहीं दी। सवाल उठ रहे हैं कि जो प्रतिनिधि क्लब चलाने के लिए जिम्मेदार हैं, उनसे इतनी बड़ी बात क्यों छिपाई गई? क्लब के नियमों के तहत किसी भी कार्यक्रम के लिए क्लब के अध्यक्ष और जनरल सेक्रेटरी से एडवांस में लिखित मंजूरी लेनी जरूरी होती है।
सदस्यों का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि उस दिन क्लब का माहौल किसी सरकारी छावनी जैसा बना दिया गया था। क्लब की लॉबी, पार्किंग और कॉमन एरिया में 50 से ज्यादा हथियारबंद पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए थे। जो नियमित सदस्य वहां अपने परिवार के साथ सप्ताहांत मनाने आए थे, उनके लिए क्लब के कई हिस्सों में प्रवेश बंद कर दिया।लिखित शिकायत में कहा गया है कि सुरक्षाकर्मियों ने क्लब के सम्मानित सदस्यों के साथ बदसलूकी की। सदस्यों को आदेश दिए गए कि वे अपनी गाड़ियां पार्किंग से तुरंत हटा लें। सदस्यों का कहना है कि जिस क्लब के वे सदस्य हैं, वहां उन्हें अपमानित होना पड़ा।
28 जून को जब सतलुज क्लब में कार्यक्रम चल रहा था, तब पुलिसकर्मियों और क्लब के सदस्यों के बीच पार्किंग में विवाद हुआ था। उसके बाद क्लब सदस्यों ने तब भी विरोध जताया था। उनका कहना था कि वे रोज क्लब आते हैं और रविवार को उन्हें यहां पर कार तक पार्क करने नहीं दी जा रही है, जबकि वे क्लब को फीस देते हैं।
- उधर भाजपा नेता का कहना है कि मैं सतलुज क्लब का सदस्य हूं। मैंने डाइनिंग हॉल बुक किया था और उसकी रसीद कटवाई है। मैंने पूरा भुगतान किया है। इसके अलावा कार्यक्रम कोई भी राजनीतिक नहीं था। यह पीएमओ का कार्यक्रम था, जिसमें सीएम सैणी आए थे। उनके साथ सभी क्लब सदस्यों ने बैठकर कार्यक्रम देखा है और खाना खाया है। सतलुज क्लब में पहले भी अलग-अलग पार्टियों के नेता आते रहे हैं। इसमें संजीव अरोड़ा, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग व अन्य कई नेताओं को अतिथि के तौर पर बुलाया जाता रहा है। यह सिर्फ एक मुद्दा बनाने की बात है।

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