राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,8जुलाई। पंजाब कांग्रेस में चुनाव से 8 महीने पहले शुरू हुई कलह थमती नहीं दिखाई दे रही है। जहां पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का गुट मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजावडिंग को बदलने के लिए अभियान छेड़े हुए है वही पांच दिन के पंजाब दौरे पर आए अखिल भारतीय कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने चरणजीत चन्नी और उनके समर्थकों को दोटूक कह दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष बदलना गुड्डे-गुडि्डयों का खेल नहीं है। हाईकमान अपना फैसला नहीं बदलेगा।
बघेल ने कहा कि चन्नी के साथ उनकी बात हुई है। चन्नी अभी बाहर हैं। इसके अलावा सुखजिंदर सिंह रंधावा से भी बात हुई है। उन्होंने कहा कि मैं सब के पास जाउंगा। बघेल का कहना है कि राजा वडिंग को 23 जिला अध्यक्षों का समर्थन है। बैठक में जिला अध्यक्ष अपनी सहमति दे चुके हैं। बघेल का ये तल्ख जवाब तब आया है, जब चन्नी गुट ने आरोप लगाया था कि उन्होंने हाईकमान को गुमराह किया। उन्होंने गलत रिपोर्ट दी । हम राजा वड़िंग की अगुआई में 2027 का चुनाव नहीं जीत सकते।
इसी बीच कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी तेवर दिखाते हुए कहा कि 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के 22 में से 10 विधायक अलग हो गए और उसके बाद भी वो चुनाव में 92 सीट जीत गए। अगर सीनियर लीडर पीछे रह गए तो नए लोग आएंगे। लोगों ने जो मन बना लिया है उसके साथ ही रहेंगे। उन्होंने चन्नी गुट का नाम लिए बगैर कहा कि आठ दस दिन देख लें। अगर उनकी अपील खारिज हो गई तो फिर से बात कर सकते हैं।
वहीं जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह का कहना है कि अब पंजाब में परीक्षण का समय नहीं है। पंजाब की लड़ाई बहुत बड़ी है और चुनाव बहुत नजदीक हैं। फोटो सेशन के जरिए अपनी ताकत दिखाने का समय नहीं है। जो हमारी छोटी-छोटी समस्या है उन्हें हल कर देना चाहिए। फोटो सेशन के जरिए नॉरेटिव सेट किए जा रहे हैं। ऐसे में अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि चन्नी गुट को बातचीत की टेबल तक कैसे लाया जाए और उससे भी बड़ा सवाल यह कि चन्नी का अगला कदम क्या होगा?।चंडीगढ़ पहुंचते ही भूपेश बघेल ने सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा से मुलाकात की। माना गया कि बाजवा के जरिए चन्नी और उनके समर्थकों तक संदेश पहुंचाया जाएगा। बाजवा ने मीडिया में भी विवाद सुलझने की बात कही, लेकिन चन्नी गुट अपने रुख पर कायम रहा।: इसके बाद कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार वेरका ने भी चन्नी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि बघेल से मिलने से पहले वेरका ने चन्नी के साथ बंद कमरे में चर्चा की। राजनीतिक हलकों में इसे दोनों पक्षों के बीच संवाद की कोशिश माना गया, लेकिन इसके बाद भी चन्नी गुट का कोई नेता बघेल से मिलने नहीं पहुंचा। इस बीच प्रभारी भूपेश बघेल ने मीडिया से यह संदेश भी दिया कि "अगर कोई मुझे चाय पर बुलाएगा तो मैं जरूर जाऊंगा।" इसके बावजूद दौरे के दूसरे दिन भी चन्नी गुट ने दूरी बनाए रखी।
अपने दौरे के पहले दिन बघेल ने पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश पदाधिकारियों, इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन विजय इंदर सिंगला और मैनिफेस्टो कमेटी के चेयरमैन सांसद अमर सिंह के साथ बैठक की। हालांकि कैंपेन कमेटी के चेयरमैन चरणजीत सिंह चन्नी और कोर कमेटी के चेयरमैन सुखजिंदर सिंह रंधावा इन बैठकों से दूर रहे। दूसरे दिन उन्होंने कार्यकारी प्रदेश अध्यक्षों, स्टेट बॉडी और जिला अध्यक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। यहां भी चन्नी गुट के नेता शामिल नहीं हुए। राजा वड़िंग गुट के नेता बड़ी संख्या में बघेल से मिलने पहुंचे और उनका स्वागत किया। इसे संगठन पर अपनी पकड़ का संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है। वहीं चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और उनके समर्थक पूरे दिन किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम में नजर नहीं आए। सूत्रों के मुताबिक, चन्नी गुट का रुख साफ है कि जिस मंच पर राजा वड़िंग मौजूद होंगे, उस मंच पर वे शामिल नहीं होंगे। वे अपनी बात सीधे हाईकमान के सामने रखना चाहते हैं।भूपेश बघेल पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग वन टु वन बैठक करेंगे। सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि क्या चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा उनसे मुलाकात करते हैं या दूरी बनाए रखते हैं। इन्हीं बैठकों से यह संकेत भी मिल सकता है कि पंजाब कांग्रेस में सुलह की शुरुआत होगी या टकराव और लंबा चलेगा।
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