रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच राजस्थान प्रदेश इकाई की भव्य ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में गूँजे डॉ संजीदा ख़ानम 'शाहीन' प्रदेश अध्यक्ष राजस्थान इकाई के जन्मोत्सव के स्वर
_रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच राजस्थान इकाई ने मनाया डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ का जन्मोत्सव
जोधपुर/रायबरेली, 10 मई 2026* – खड़ी बोली और ग़ज़ल की मंचीय गरिमा को नई ऊँचाई देते हुए *रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच, राजस्थान इकाई* ने आज सायं 5 बजे से 7:30 बजे तक गूगल मीट पर डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ के जन्मोत्सव पर भव्य ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के चरम उत्कर्ष तक पहुँचा और देश-विदेश के 30 से अधिक साहित्यकारों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार *डॉ. त्रिलोक चंद सेन* ने की। मुख्य अतिथि के रूप में जन्मदिन की नायिका *डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’* – जोधपुर निवासी सुप्रसिद्ध शायरा, चिकित्सक एवं मंच की केंद्रीय पटल प्रभारी – मंचासीन रहीं। अति विशिष्ट अतिथि *डॉ. सुधीर श्रीवास्तव* रहे।
सरस्वती वंदना आ. दिलीप कुमार शर्मा, गणेश वंदना एवं स्वागत गीत *डॉ. शशि जायसवाल ‘चंद्रिका’, प्रयागराज* तथा स्वागत भाषण *संस्थापक आ. आर. एम. लाल* ने प्रस्तुत किया।
संचालन का दायित्व प्रथम सत्र में डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ‘यमराज मित्र’, गोंडा* और द्वितीय सत्र में दीपा शर्मा ‘उजाला’ने बखूबी निभाया।
गोष्ठी की मुख्य झलकियाँ
अध्यक्षीय अनुमति के बाद वरिष्ठ साहित्यकार *ऊषा सूद* ने आशीर्वचन में कहा –
_“सागर में एक लहर तेरे नाम की, तुझे मुबारक आज घड़ी सुबह शाम की”_
इसके साथ उन्होंने माँ पर मार्मिक रचना _“मौत के लिए बहुत सस्ते… माँ है”_ प्रस्तुत कर माहौल भावुक कर दिया।
रचनाकारों की काव्य प्रस्तुतियाँ
- संस्थापक डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’ ने अपना मुक्तक पढ़ा।
- डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने मुक्तकों से चार चाँद लगाए।
- दिलीप कुमार शर्मा ने _“आपका सुखी रहे संसार…”_ गाकर माहौल सरस किया।
- अविनाश खरे ने _“एक नया सवेरा…”_, राम लखन वर्मा ने दोहे, डॉ. शशि जायसवाल ‘चंद्रिका’ ने सुंदर रचना सुनाई।
- महेंद्र भट्ट ने गद्य व्यंग्य _‘चिंकुटी’_, अवधेश ने _“साहित्य में सभी विधाओं की बहिन संजीदा खान है”_ के साथ माँ पर मार्मिक रचना पेश की।
- कुंतल हर्ष, डॉ. विजयलक्ष्मी ‘अनाम अपराजिता’, जनकवि सुखराम, छोटे लाल, रामदेव ‘राही’ ने अपनी रचनाओं से गोष्ठी को रसिक्त किया।
- मीना रावलानी ने _“क्या देखा है माँ को…”_ और सुधीर श्रीवास्तव ने _“माँ की ममता है बड़ी अपार”_ सुनाकर माँ के भाव को केंद्र में रखा।
मुख्य अतिथि की प्रस्तुति
जन्मोत्सव की ‘रूहे-रवा’ *डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’* ने _‘धरती धोरा रि राजस्थान रि माटी’_ पर आधारित रचना और तरन्नुम में ग़ज़ल प्रस्तुत की। अपनी पुस्तक *‘कहकशां’* से पढ़ा –
_“कहकशां तेरी मेरी बातों का, तेरा साथ हो दिलकश नज़ारा हो, माहौल में खुशनुमा रंगीनी छा गई”_
श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।
समापन और संदेश ,अध्यक्ष डॉ. त्रिलोक चंद सेन ने कहा कि यह गोष्ठी ‘सत्ता अनुकूल’ से ‘माँ अनुकूल’ की यात्रा का प्रतीक बनी। *राम मनोहर लाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया और रामदेव राही ने भविष्य में पुनः ऐसे आयोजन की अभिलाषा जताई।
कार्यक्रम में पत्रकार जे.पी. शर्मा जयपुर गज़ल गुरु मनशाह नायक,डॉ. हस्तमल आर्य,राखी पुरोहित,डॉ. शरीफ सहित अनेक साहित्यकारों ने शुभकामना संदेश भेजे। सबसे भावुक पल तब आया जब *नन्हा कलमकार मोहम्मद आतिफ खान – डॉ. शाहीन के सुपुत्र ने माँ पर लिखा: “माँ तुम तो अलार्म हो, जागती हो रातों को, दर्द छुपाती हो और दिन में कामों की आड़ में मुस्काती हो”_
संस्थागत पहचान
गोष्ठी का सफल संचालन *संस्थापक एवं मुख्य संयोजक डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’ रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच समूह भारत, की देखरेख में हुआ। समूह में 19 प्रदेश इकाइयाँ और 16 अंतर्राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर सक्रिय हैं। डॉ. शिवनाथ सिंह वर्तमान में *वाईस चांसलर, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, रायबरेली, उत्तर प्रदेश* के पद पर हैं और प्रधान संपादक, हँसवाहिनी ग्रुप पत्रिका प्रकाशन समूह* के रूप में भी कार्यरत हैं।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. शिव ने अपनी प्रेरणादायी पंक्तियाँ सुनाईं जो अब पूरे साहित्यिक जगत में चर्चित हैं:
_“बहना वा आगे बढ़ना दरिया का धर्म है, हम राह में ही थककर क्यों चूर हो गए।
जीना है तो जिंदगी ऐसे जियो यारों, शिव, पीकर भी हलाहल मशहूर हो गए।”_
इन पंक्तियों ने समस्त प्रतिभागियों में नवचेतना और संघर्ष का संबल भरा। माँ, राजस्थान की माटी और मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित यह गोष्ठी निश्चित ही हिंदी साहित्य के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय बनकर दर्ज होगी।

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