लखनऊ, पृथ्वी दिवस के अवसर पर अणुव्रत लेखक मंच एवं पर्यावरण जागरूकता अभियान के संयुक्त तत्वावधान में अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा मासिक ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस परिचर्चा का केंद्रीय विषय _“पृथ्वी हमें उपहार में मिली है या उधार?”_ रखा गया है।
संगोष्ठी बुधवार 22 अप्रैल 2026 को रात्रि 8:30 बजे जूम प्लेटफॉर्म पर सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संकट को केवल बाहरी समस्या न मानकर उसके नैतिक और आंतरिक पक्ष पर सामूहिक चिंतन करना है।
*विशेषज्ञ वक्ता रखेंगे विचार
परिचर्चा में विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रयागराज के वरिष्ठ चिंतक डॉ आनंद प्रकाश त्रिपाठी एवं बीकानेर के शिक्षाविद डॉ टी के जैन मुख्य रूप से अपने विचार साझा करेंगे। दोनों वक्ता पर्यावरण, संयम और अणुव्रत दर्शन के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालेंगे।
तीन बिंदुओं पर केंद्रित रहेगा चिंतन
आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि इस बार संगोष्ठी तीन प्रमुख प्रश्नों पर केंद्रित रहेगी:
1. क्या आज का बाहरी पर्यावरण संकट वास्तव में हमारे आंतरिक नैतिक संकट का प्रतिबिंब है?
2. आधुनिक जीवनशैली में ‘जरूरत’ और ‘लालच’ के बीच की लक्ष्मण रेखा कहां खो गई है?
3. क्या अणुव्रत के मूलमंत्र ‘संयम’ में ही पृथ्वी संकट का स्थायी समाधान छिपा है?
4. आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों से विशेष अनुरोध किया है कि वे पुस्तकीय या सुनी सुनाई बातों की जगह अपने स्वयं के अनुभव, चिंतन और संकल्प से जुड़े सारगर्भित विचार ही प्रस्तुत करें, ताकि चर्चा अधिक जीवंत और व्यावहारिक बन सके।इस ऑनलाइन संगोष्ठी में देश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकार, शिक्षाविद और पर्यावरण प्रेमी जुड़ेंगे। संभावित प्रतिभागियों में कवि डॉ कमल नौलखा, जितेंद्र कोठारी, डॉ नीलम जैन, विश्व प्रताप सिंह, डॉ खुशबू शांतिलेख लखनऊ उत्तर प्रदेश लेखक सुनील कुमार माथुर, अजय अग्रवाल, अरविंद हर्ष, डॉ स्वाति बंसल जोधपुर से, विनोद कोठारी, सुषमा सिंघल, शैलेंद्र सिंह, परमिता, पायल सहित कई अन्य रचनाकार शामिल रहे।

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