राजधानी में अनेक स्थानों पर ठगी की वारदात को दिया अंजाम
जयपुर। अगर कोई व्यक्ति आपकी खाली पड़ी कॉमर्शियल प्रोपर्टी किराये पर लेकर उसमें अपनी फर्म खोलना चाहती है तो सावधान हो जाएं। यह ठगी का एक नया तरीका सामने आया है। राजधानी में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर इस पेटर्न पर ठगी की घटनाएं हो चुकी है। प्रोपर्टी मालिक को न केवल किराया मिला बल्कि किरायेदारी खत्म करने के नाम पर लाखों रूपए मांगे जा रहे है। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करवाने की धमकी दी जा रही है। राजधानी एक दर्जन से अधिक लोगों ने पहली बार एकजुट होकर आवाज उठाई है।
इस आधार पर पुलिस थाना शिप्रापथ, जयपुर सिटी (दक्षिण) में एक संगठित धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी एवं आपराधिक षड्यंत्र का गंभीर मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर संख्या 0772/2025 के अनुसार अभियुक्तों ने कई लोगों के साथ इस तरह की धोखाधड़ी की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार परिवादी सुभाष चंद भंडारी, प्रोपराइटर जेडी पाइप इंडस्ट्रीज, एच-139, रीको इंडस्ट्रियल एरिया, मानसरोवर एवं अन्य ने पीडि़तों ने बताया कि रिको औद्योगिक क्षेत्र, मानसरोवर स्थित बिंदुजा एक्सपोर्ट प्रा. लि., रेलिगेट इंडस्ट्रीज प्रा. लि., वरनदा एक्सपोर्ट सहित उनसे जुड़ी कंपनियों, उनके निदेशकों ने गंभीर आर्थिक धोखाधड़ी की है। षड्यंत्र रचते हुए निवेशकों को गुमराह किया हैं। इस संबंध में शिप्रा पथ थाने में दो परिवाद दर्ज है। एक एफाआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है। एक शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में भी प्रस्तुत की गई है। पूरे मामले के मास्टरमाइंड के रूप में आरोपी कंपनियों के सहयोगी वासुदेव अग्रवाल, उनके पुत्र मोहित अग्रवाल तथा किरायेदार से जुड़े लोगों की अहम भूमिका रही है। ये सब सुनियोजित तरीके से आर्थिक शोषण करते हैं। नेहा गर्ग पत्नी मोहित गर्ग, निवासी टोंक रोड जयपुर, बिंदुजा और रेलिगेट सहित अन्य कंपनियों की निदेशक हैं, जबकि मोहित गर्ग, वासुदेव अग्रवाल (नेहा गर्ग के पिता) और मोहित अग्रवाल (नेहा गर्ग के भाई) इन्हें सहयोग, संरक्षण, उच्चाधिकारियों को प्रभावित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ये सभी पहले सिग्नोरिया क्रिएशन लिमिटेड में एक ही स्थान पर व्यापार करते थे और आज भी आपसी तालमेल से नई स्कीम बनाकर लेनदेन संचालित कर रहे हैं। संबंधित कंपनियां शेयरहोल्डिंग आधारित हैं और आईपीओ लाकर धन जुटाया गया। इसकी जांच आवश्यक है, क्योंकि जारी शेयर मूल्य की तुलना में वर्तमान बाजार मूल्य काफी कम बताया जा रहा है, जबकि फैक्ट्री और उत्पादन क्षमता सीमित है। इन लोगों का पूर्व में गारमेंट्स क्षेत्र में कोई ठोस इतिहास नहीं रहा और पहले मार्बल, टाइल, ब्याज का कारोबार किया जाता था। कंपनियों ने देश के एक प्रमुख सरकारी बैंक से बड़े ऋण लिए, लेकिन बाद में बैंक नोटिस स्वीकार नहीं किए, जिससे मजबूर होकर बैंक को दैनिक समाचार पत्र में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित करना पड़ा। एक निदेशक पूजा शर्मा ने पहले से सशर्त अग्रिम जमानत ले रखी है। अदालत की तारीखों पर जानबूझकर वकील की अनुपस्थिति के जरिए मामला लंबा खींचा जा रहा है। वहीं मोहित गर्ग का नाम दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े एक अन्य मामले में भी सामने आया है। इनके पूरे नेटवर्क, कंपनियों, आईपीओ, बैंक ऋण एवं संपत्तियों की निष्पक्ष जांच की मांग की जानी चाहिए।
सुनियोजित षड्यंत्र से बनाया शिकार
पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि अभियुक्तगण आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं, जिन्होंने आपस में मिलीभगत कर सुनियोजित षड्यंत्र के तहत लोगों को विश्वास में लेकर छल-कपट, धोखाधड़ी एवं कूटरचना के माध्यम से करोड़ों रुपए के अवैध लाभ अर्जित करने का तरीका बना रखा है।
परिवाद के अनुसार पूजा शर्मा, नेहा गर्ग पुत्री वासुदेव अग्रवाल ने अपनी विभिन्न फर्म के संचालन के लिए परिवादी के औद्योगिक परिसर को किराये पर लिया। अभियुक्तों की फर्मों के लिए भूतल, द्वितीय तल एवं तृतीय तल पर हजारों वर्गफुट क्षेत्र किराये पर लिया गया, जिसका मासिक किराया, जीएसटी, टीडीएस एवं अन्य देयकों सहित लाखों रुपए बनता है। इसके बावजूद अभियुक्तगण ने कई महीनों तक किराया, जीएसटी एवं टीडीएस जमा नहीं कराया। किराए की आंशिक अदायगी के लिए दिए गए चेक भी जानबूझकर अनादरित कराए गए।
इतना ही नहीं, अभियुक्तों द्वारा अपने कर्मचारियों एवं मजदूरों को भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया, जिससे परेशान होकर कर्मचारी एवं मजदूर आए दिन विरोध प्रदर्शन करते रहे। अभियुक्तगण पुलिस और प्रशासन से बचने के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छिपते रहे और किरायेशुदा परिसर को बंद कर फरार हो गए।
परिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि अभियुक्तगण ने किरायेशुदा परिसर खाली करने की एवज में उससे अवैध रूप से लाखों रुपये की मांग की। मांग पूरी न करने पर संपत्ति को विवादित करने, किसी अन्य को जबरन किराये पर देने तथा उस पर ऋण लेने जैसी धमकियां दी गईं। अभियुक्तगण द्वारा यह दावा किया गया कि उनकी पुलिस व प्रशासन में ऊंचे स्तर तक पहुंच है और परिवादी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
कूटरचित किरायानामा तैयार किया
प्रकरण में एक अत्यंत गंभीर तथ्य यह भी सामने आया है कि अभियुक्तों ने 19 जुलाई 2023 का एक फर्जी एवं कूटरचित किरायानामा तैयार किया, जिस पर परिवादी के जाली हस्ताक्षर किए गए। इसी कूटरचित दस्तावेज के आधार पर अभियुक्तों ने एक नई फर्म के नाम से जीएसटी पंजीकरण प्राप्त किया तथा बैंक खाता भी खुलवाया। परिवादी का कहना है कि उसने न तो ऐसा कोई किरायानामा बनाया और न ही उस पर कभी हस्ताक्षर किए।
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कई व्यक्तियों के साथ कर चुके ठगी
अभियुक्तगण पूर्व में भी इसी तरह अन्य व्यक्तियों की संपत्तियां किराये पर लेकर किराया हड़प चुके हैं, संपत्तियों को विवादित कर उन पर ऋण ले चुके हैं और संबंधित लोगों को लंबे कानूनी विवादों में फंसा चुके हैं। इस प्रकार की धोखाधड़ी एक दर्जन से अधिक पीडि़तों के साथ की जा चुकी है, जिससे यह मामला संगठित अपराध की श्रेणी में आता है।
पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण:
पुलिस ने प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 316(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच सहायक उप निरीक्षक लाला राम को सौंपी गई है।
*पीडि़तों की प्रमुख मांगें:*
1.प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया जाए।
2.सभी संबंधित कंपनियों और निदेशकों की विशेष लेखा एवं वित्तीय जांच कराई जाए।
3.किराया, वस्तु एवं सेवा कर तथा कर कटौती राशि की चोरी की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
4.फर्जी किरायानामा एवं जाली दस्तावेज तैयार करने वालों पर अलग से कठोर मुकदमा चलाया जाए।
5.धोखाधड़ी से अर्जित चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों को तत्काल कुर्क किया जाए।
6.पीडि़त संपत्ति मालिकों और कर्मचारियों को अंतरिम आर्थिक राहत और मुआवजा दिया जाए।
7.आरोपियों को दिए गए बैंक ऋणों और वित्तीय लेनदेन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
8.धन शोधन, निवेश घोटाले और कंपनी अनियमितताओं की केन्द्रीय एजेंसियों से जांच कराई जाए।
9.भविष्य में ऐसी ठगी रोकने के लिए वाणिज्यिक किरायेदारी के सख्त नियम लागू किए जाएं।
10.मामले की सुनवाई त्वरित न्यायालय में कराकर समयबद्ध न्याय सुनिश्चित किया जाए।

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